Poem tumhe yaad hai

तुम्हें याद है

तुम्हें याद है तारों की चादर में बीती वो रात 
और घास का वो मखमली बिस्तर
जहाँ तुम्हारे कंधे को मैंने अपना तकिया बनाया था
उस रात ठंडी हवाएँ जब मुझे छू रहीं थी
तो तुमने अपने बदन से उन्हें रोका था। 
उस रात हम एक थे, तुम मुझमें थे और मैं तुममें
वो रात आख़री रात थी, उस बुझते हुए रिश्ते की 

क्या तुम्हें याद है?

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